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TAHAR GAYA THA KOI WAQT

TAHAR GAYA THA KOI WAQT


ठहर गया था कोई वक़्त की निशानी बनके,
वो भी बह गया आज आँखों का पानी बनके,
एक उम्र से संभाला था हमने जो दरिया,
बहा ले गया वो उसे एक रात तूफानी बनके !
TAHAR GAYA THA KOI WAQT TAHAR GAYA THA KOI WAQT Reviewed by Bhagyesh Chavda on January 19, 2016 Rating: 5

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