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क्यूंकि ज़िन्दगी में बढ़ते रहना हमारा काम है

क्यूंकि ज़िन्दगी में बढ़ते रहना हमारा काम है


जूनून इतना है इन पैरो में भरा,
फिर क्यों रहूं में दर-दर खड़ा..
आज जब मेरे सामने है, इतना रास्ता पड़ा.. 
जब तक मंजिल ना पा सकूँ, तब तक मुझे ना आराम है,
क्यूंकि ज़िन्दगी में बढ़ते रहना हमारा काम है।

कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया.. कुछ बोझ अपना बँट गया..
अच्छा हुआ तुम मिल गई, कुछ रास्ता यूँ ही कट गया..
क्या राह में परिचय दूँ, राही हमारा नाम है..

क्यूंकि ज़िन्दगी में बढ़ते रहना हमारा काम है।

जीवन अधूरा लिए हुए, पाता कभी खोता कभी..
आशा निराशा से घिरा, हँसता कभी रोता कभी..`
गति-मति ना हो अवरूद्ध, इसका ध्यान सुबह-शाम है..

क्यूंकि ज़िन्दगी में बढ़ते रहना हमारा काम है।

इस वक़्त के प्रहार में, किसको नहीं बहना पड़ा..
सुख-दुख हमारी ही तरह, किसको नहीं सहना पड़ा..
फिर क्यों कहु बार-बार की मेरा ही मन नाकाम है..

क्यूंकि ज़िन्दगी में बढ़ते रहना हमारा काम है।

मैं पूर्णता की खोज में, दर-दर भटकता ही रहा..
प्रत्येक डगर पर कुछ न कुछ, रोड़ा अटकता ही रहा..
निराशा क्यों हो मुझे? अरे जीवन ही इसी का नाम है..

क्यूंकि ज़िन्दगी में बढ़ते रहना हमारा काम है।

साथ में चलते रहे, कुछ बीच ही से मुड़ गए..
गति न जीवन की रूकी, जो गिर गए सो गिर गए..
रहे हर दम जो, उसी की सफलता को सलाम है..

क्यूंकि ज़िन्दगी में बढ़ते रहना हमारा काम है।
क्यूंकि ज़िन्दगी में बढ़ते रहना हमारा काम है क्यूंकि ज़िन्दगी में बढ़ते रहना हमारा काम है Reviewed by Bhagyesh Chavda on January 28, 2016 Rating: 5

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