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Hotho par ek muskurahat utri he


Uski surat se to hu anjan ab tak par muhbbat dil tak ruhani utari h ,
Uske ijehar m muhbbat to dikhti h mujhe dil-e-arzoo m uske kisi aur ki nishani utri h ,
M iljam nhi laga skta bewafai ka us par ,
Kyuki dil par uske bhi talwar bemayani utri h ,
Bus ab ek soch dil main aati h kaunsi h wo baate jo usko hasati h ,
Lagta h bita du zindgani meri ek kirdar bankar ,
Jab jab bato se meri uske hotho par ek muskurahat utri h .

उसकी सूरत से तो हु अनजान अब तक पर मुहब्बत दिल तक रूहानी उतरी है ,
उसके इजहार में मुहब्बत भी दिखती है मुझे पर दिल-ए-आरज़ू में उसके किसी और की निशानी उतरी है ,
मैं इल्जाम नहीं लगा सकता बेवफाई का उस पर क्योंकि दिल पर भी उसके तलवार बेमयानी उतरी है ,
बस अब एक सोच दिल में आती है कौनसी है वो बाते जो उसको हँसाती है ,
लगता है बिता दू ज़िंदगानी मेरी एक किरदार बनकर जब जब बातो से मेरी उसके होठो पर एक मुस्कराहट उतरी है ।

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